दरअसल जब वे अपने लक्ष्य पर निशाना साध रही होती हैं तो कुछ अंक भर हासिल नहीं कर रही होती हैं. वह अपने सपनों को उनकी मंज़िल तक पहुंचा रही होती हैं. जब वह लक्ष्य भेद रही होती हैं तो दरअसल पितृ सत्ता के बंधनों, अभावों, परेशानियों और कठिनाइयों से उपजी चुनौतियों को भी भेद रही होती हैं. [….]