कुछ यादें ऐसी होती हैं जिन्हें काग़ज़ पर उतारना आसान नहीं होता. शब्द ठिठक कर रुक जाते हैं और दिल बार-बार अतीत की ओर लौट जाता है. हिंदुस्तान के महानतम फ़ोटोग्राफ़रों में से एक और अपने पुराने ख़ैरख़्वाह साथी रघु राय 26 अप्रैल 2026 को दिल्ली में [….]
न्यू अलबर्ट कम्पनी की ‘रामायण‘ की स्क्रिप्ट सुधारते वक्त पंडित राधेश्याम ने शायद सोचा भी न हो कि रामायण से जुड़कर उन्हें ऐसी ख्याति मिलेगी जो समय की सीमाओं के पार हमेशा गूंजती रहेगी. हालांकि ‘राधेश्याम रामायण’ इसके दस साल बाद अस्तित्व में आई मगर इस घटना ने थिएटर से उनके बचपन के लगाव को साकार करने के साथ ही पारसी [….]
उर्दू के नामवर उपन्यासकार और कहानीकार पद्मश्री क़ाज़ी अब्दुल सत्तार की पैदाइश सीतापुर के मछरेहटा में हुई थी. डॉ.प्रेम कुमार से बातचीत में उन्होंने अपने बचपन के मोहर्रम की यादों का एक वाक़या तफ़्सील से बयान किया, जो दिलचस्प है और मर्मस्पर्शी भी. डॉ.प्रेम कुमार की किताब ‘बातों-मुलाक़ातों में क़ाज़ी अब्दुल सत्तार’ में दर्ज उसी बातचीत [….]