अफ़्रीका के और अफ़्रीकी मूल के खिलाड़ियों ने दुनिया में फ़ुटबॉल खेल और फ़ुटबॉल खेल की दुनिया बदल दी है. भौगोलिक दुश्वारियां, उपनिवेशीय शासन द्वारा छोड़ी गई बदग़ुमानियाँ, सैन्य शासकों और तानाशाहों के बदमग़्ज़ियां, उनसे छुटकारा पाने के लिए अनवरत [….]
नई दिल्ली | इशारा अंतर्राष्ट्रीय कठपुतली थिएटर फ़ेस्टिवल का 22वां संस्करण 13 फरवरी से 22 फरवरी 2026 तक इंडिया हैबिटेट सेंटर में होगा. इस दौरान दुनिया भर से आई अनूठी कठपुतलियों की प्रस्तुति होगी. यह फ़ेस्टिवल विभिन्न देशों के कलाकारों को एक मंच पर लाता है, जिससे बहुसांस्कृतिक संवाद और आदान-प्रदान के साथ-साथ विश्वस्तरीय [….]
मुझे यह भी नहीं मालूम
कि मैं कितनों को नहीं जानता.
शुक्ल जी से मैं कभी मिला नहीं, मुलाक़ात का कोई ज़रिया नहीं बना, कभी आमना-सामना भी नहीं हुआ. हाँ, दूर से उन्हें कई बार देखने-सुनने का मौक़ा मिला, उनका लिखा पढ़ता रहा, उनके बारे में ख़बरें देखता रहा. उन्हीं की कविता से ली गई पंक्ति से कहा जाए तो मैं सचमुच उनको नहीं जानता था. [….]
सत्रह दिसंबर की रात सूफ़ी परंपरा में मातम की नहीं, विसाल की रात है. मौलाना जलालुद्दीन रूमी के लिए मौत कोई अंत नहीं, बल्कि माशूक़ से मुलाक़ात थी. मेरे लिए रूमी को याद करना, उनके लिखे को पढ़ना, उसे सुनाना हर बार नए शब्दों में लिखना—अपने दिल पे पड़े बोझ को हल्का करने जैसा होता है. रूमी की ज़िंदगी, इश्क़ का उनका फ़लसफ़ा, [….]
यूं तो खेल की समाप्ति के बाद जीत की ख़ुशी और हार के ग़म को मैदान का आधा-आधा हिस्सा शेयर कर लेना चाहिए. लेकिन ऐसा होता नहीं है. जीत के रंग इस क़दर प्रबल और चमकीले होते हैं कि हार के रंग स्वतः निस्तेज और क्षीण हो जाते हैं कि उनकी उपस्थिति या तो महसूस नहीं होती या फिर उसका हल्का-सा आभास भर होता है. लेकिन कोई [….]
आपके पास हज़ारों तमगे हो सकते हैं,पर कोई एक तमगा आपके गले में शोभायमान नहीं होता है. हज़ारों जीत आपके खाते में होती हैं, पर कोई एक जीत आपके हाथों से फिसल-फिसल जाती है. और वो एक छूटा तमग़ा, वो बाक़ी रही एक जीत आपकी सबसे बड़ी चाहना बन जाती है, उम्र भर की सारी उपलब्धियों पर भारी पड़ती जाती है. अंततः उस [….]