उन कहानियों को सुनते हुए तब जंगल का इतना ही मतलब समझ आता था कि वहाँ तरह-तरह के पेड़-पौधे और जानवर हैं, जिनकी अपनी दुनिया है. वहाँ शेर की माँद है, ख़रगोश के बिल और दीमक की बाँबी भी. लोमड़ी है कि दिन भर बिल खोदती है [….]
चिंतन ने दो-तीन रोज़ पहले एक संदेश भेजा, जिसमें ट्वीटर पर पोस्ट किए हुए तीन फ़ोटो हैं. इस फ़ोटो में पीले रंग में रंगी साइकिलें दिखाई देती हैं. एक फ़ोटो में साइकिलों पर सवार सरकारी अफ़सर भी हैं. डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर्स (आईएएस) के ट्वीटर हैंडिल पर पोस्ट इन तस्वीरों के साथ संदेश है – बाइक्स ऑफ़ बिजनौर – वेस्ट टु वेल्थ. [….]
अगर आप रेडियो सुनते हुए बड़े हुए हैं तो ‘‘दिन है सुहाना आज पहली तारीख़ है, ख़ुश है ज़माना..’’ वाला गाना आपने ज़रूर सुना होगा. आपने यह गाना सुना भी हो तो मुमकिन है कि ओम प्रकाश भण्डारी को न जानते हों. यह ओम प्रकाश अमृतसर के जलालाबाद क़स्बे में पैदा हुए. कम उम्र में ही शायरी में मुब्तला हुए तो क़मर जलालाबादी कहलाए. [….]