नई दिल्ली | गगन गिल ने हिन्दी कविता को नया स्वर, नया आयाम दिया है. उन्हें साहित्य अकादेमी पुरस्कार दिया जाना उनके इस योगदान का रेखांकन है. इस पुरस्कार के लिए [….]
नींद भी क्या नेमत है जिसके लिए दुनिया में करोड़ों लोग तरसते हैं, लाखों लोग इलाज कराते-दवाइयाँ खाते हैं और जाने कितने हज़ार हैं जो रात-रात भर बिस्तर पर सर पटकते थक जाते हैं पर सो नहीं पाते. और फिर मिथकों में कुम्भकरण जैसे किरदार भी हैं, जो ब्रह्मा के श्राप से छह महीनों तक गहरी नींद में रहते थे. या फिर यूरोपीय मिथक में सम्राट स्टेफ़ेन और रानी [….]
बरेली | ‘मेज़ॉक’ कहानियों का ऐसा कोलाज है, जिसमें प्रकृति है, प्रेम है, ज़िंदगी की नैसर्गिक सहजता और उन्मुक्तता और ख़्वाहिशें हैं, महानगरीय ज़िंदगी की चुंबकीय चकाचौंध और उसकी भूलभुलैया है, रोज़गार के सवाल हैं और व्यवस्था के मकड़जाल भी, सैलानियों को खींचते पहाड़ हैं, और पहाड़ से गए लोगों की बाट जोहती मद्धिम पुकार है, मगर जिसकी अनुगूँज [….]
नई दिल्ली | 14वाँ नेशनल स्ट्रीट फ़ूड फ़ेस्टिवल 14 दिसंबर से जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में शुरू हो रहा है. नेशनल एसोसिएशन ऑफ़ स्ट्रीट फ़ूड वेंडर्स ऑफ़ इंडिया (नासवी) के इस सालाना उत्सव में शौक़ीन देश के अलग-अलग इलाक़ों के ख़ास ज़ाइक़ों का मज़ा ले सकते हैं. हर साल तीन दिनों तक चलने वाला उत्सव इस बार हालांकि सिर्फ़ दो दिन का होगा. [….]
जानकीपुल ट्रस्ट ‘जानकीपुल शशिभूषण द्विवेदी स्मृति सम्मान’ 2025 के लिए प्रविष्टियाँ आमंत्रित कर रहा है. हिन्दी के सुप्रसिद्ध कथाकार स्मृतिशेष शशिभूषण द्विवेदी की स्मृति में जानकीपुल ट्रस्ट द्वारा ‘जानकीपुल शशिभूषण द्विवेदी स्मृति सम्मान’ वर्ष 2024 में स्थापित किया गया था. पहला सम्मान निर्णायकों प्रियदर्शन और मनीषा कुलश्रेष्ठ द्वारा कथाकार दिव्या विजय को [….]
कारा एंटोनेली की बनाई एनिमेटेड फ़िल्म ‘द क्लॉक टॉवर’ में एक ख़ूबसूरत बैलेरीना नर्तकी को श्राप देकर एक चुड़ैल एक घंटाघर की सबसे ऊपरी मंज़िल में क़ैद कर लेती है. वो घंटाघर एक मनोरम शहर के बीचोबीच खड़ा है जिसके चारों तरफ हरियाली, रंगीन फूलों की छटा और प्राकृतिक ख़ूबसरती बिखरी है. चुड़ैल बैलेरीना नर्तकी को यह कहकर फुसला लाती है कि अगर उसे [….]
बरेली | शहर के प्रतिष्ठित विंडरमेयर थिएटर फ़ेस्टिवल में इस बार अवार्ड्स का एक नया अध्याय जुड़ गया है. फ़रवरी में होने वाले नाट्य उत्सव के 15वें संस्करण में देश भर के नाट्य दलों को शामिल होने का मौक़ा देने और उनकी प्रतिभा को एक नायाब मंच मुहैया कराने के इरादे से इसे प्रतिस्पर्धी कला उत्सव बनाने का फ़ैसला लिया गया है. [….]