घर की एक बालकनी मुख्य सड़क की ओर है. यों तो यह सड़क शहर की दो मुख्य सड़कों को जोड़ती है, लेकिन अब इसने ख़ुद भी मुख्य सड़क की शक़्ल अख़्तियार कर ली है. ख़ूब आवाजाही रहती है इस सड़क पर. सड़क के उस पार बालकनी के ठीक सामने एक खेत है. [….]
अगर आप रेडियो सुनते हुए बड़े हुए हैं तो ‘‘दिन है सुहाना आज पहली तारीख़ है, ख़ुश है ज़माना..’’ वाला गाना आपने ज़रूर सुना होगा. आपने यह गाना सुना भी हो तो मुमकिन है कि ओम प्रकाश भण्डारी को न जानते हों. यह ओम प्रकाश अमृतसर के जलालाबाद क़स्बे में पैदा हुए. कम उम्र में ही शायरी में मुब्तला हुए तो क़मर जलालाबादी कहलाए. [….]
आकाशवाणी के कार्यक्रमों से लेकर फ़िल्मों के संस्कृतनिष्ठ गीतों तक जिस एक शख़्स की छाप हमेशा बराबर मिलती है, वह पंडित नरेंद्र शर्मा हैं. बहुआयामी व्यक्तित्व वाले नरेंद्र शर्मा हिंदी की आन-बान और शान थे. कवि-गीतकार, लेखक, अनुवादक, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और प्रशासक – जीवन में जो भी भूमिका मिली उन्होंने अपनी छाप छोड़ी. [….]
उस रोज़ महराजगंज से आई एक फ़ोटो में किसी को हाथी की पूंछ पर लाल-पीले रंग के रिफ़्लेक्टर बांधते देखा. पहले तो लगा कि कोई चुहल कर रहा होगा मगर उस तस्वीर में कौतुक का तत्व भी था. सो कैप्शन खोजकर पढ़ा तो मालूम हुआ कि ट्रैफ़िक इंस्पेक्टर हैं. और उनकी मंशा यह कि पूंछ देखकर लोग ट्रैफ़िक सुरक्षा के प्रति जागरूक होंगे. [….]