देवरिया | सीताराम नाम के यह बुज़ुर्ग अपनों के सताये हैं. खजड़ी बजाकर वह जो गाते होते हैं, वह कोई गीत या भजन नहीं, उनकी अपनी ज़िंदगी की कहानी है. दया करके लोग उन्हें जो कुछ दे जाते हैं, उसे जमा करके वह मुकदमे का ख़र्च जुटाते हैं. [….]
उन्नाव | सैदापुर गांव के उस कुनबे को किसी नजूमी ने गड़ा हुआ मिलने के बारे में कभी नहीं बताया था. तो घर के लिए नींव खोदते वक़्त मिले ख़ज़ाने को पुरखों का आशीर्वाद मानकर भाइयों ने तो आपस में बाँट लिया था मगर बांगरमऊ पुलिस ने गाँव पहुंचकर ख़ज़ाना कब्ज़े में ले लिया. हालांकि एक भाई का हिस्सा पुलिस को जुटाना अभी बाक़ी है. [….]
श्रावस्ती | यहाँ हवाई जहाज तो नहीं उतरते मगर पच्चीसेक साल पहले बनी हवाई पट्टी ज़रूर है. और यह भी कम त्रासद नहीं कि श्रावस्ती अब तक रेलवे के नक्शे पर नहीं आ सका है. जिले को रेलवे लाइन से जोड़ने की मांग पर अर्से से जूझ रहे लोगों की उम्मीदों पर पानी फिर गया जब रेलवे बजट में इस बार भी खलीलाबाद, बहराइच बाया भिनगा रेल लाइन का ज़िक्र नदारद पाया. [….]
तीस जनवरी राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी का शहीद दिवस है. उन्हें याद करके कृतज्ञता जताने के साथ ही नेता और गणमान्य लोग राजघाट जाकर उनकी समाधि पर फूल चढ़ाते हैं. दिल्ली में राजघाट पर बापू की समाधि के बारे में दुनिया जानती है मगर बापू की दो और समाधियों के बारे में स्थानीय लोगों के सिवाय कम लोग ही जानते हैं. [….]