(माँ को केंद्र में रखकर राजिंदर अरोड़ा ने पिछले दिनों जो कुछ लिखा है, वह माज़ी का आईना है, वह हमारे समय और अतीत के बीच ऐसा सेतु भी रचता है, जिससे गुज़रते हुए हम ज़िंदगी की तमाम ख़ुशहाली, हालात से पैदा तल्ख़ियों को ज़्यादा क़रीब से देख-समझ पाते हैं और जो इनके बीच संतुलन बनाकर जीते जाने की कहानी भी है. पिछले कुछ [….]