फ़ारसी का यह एक लफ़्ज़ इतना अर्थपूर्ण है कि छोटी-मोटी पोथी लिखी जा सकती है और उपमा के तौर पर इसका इस्तेमाल इसे गहरे नए अर्थ देता है. ज़िंदगी की बुनियादी ज़रूरत में शुमार यह शै आब एक लिहाज से ज़िंदगी देता है, फिर ज़िंदगी भर गढ़ता है. [….]
उर्दू की प्रगतिशील धारा के कवियों में जनाब वामिक़ जौनपुरी एक रौशन मीनार की तरह दीप्तिमान हैं. एक प्रगतिशील कवि होने के नाते वामिक़ साहब विचारधारात्मक प्रोपगंडे को साहित्य के लिए ज़रूरी मानते हैं पर उनकी शायरी में नारा अपनी कलात्मकता के साथ इस तरह दिखलाई पड़ता है कि वह काव्य सौन्दर्य का एक अंग बन जाता है. [….]