ज़िंदगी कभी एकरेखीय नहीं चलती. सीधी-सरल भी नहीं होती. इसमें इतने उच्चावच होते हैं और ये इतनी जटिल होती है कि कई बार चकित रह जाना पड़ता है. ये सुख-दुख के महीन रेशों से इतनी जटिल बुनावट वाली होती है कि इन दोनों को कैसे और कितने भी प्रयासों से कहां अलगाया जा सकता है. उम्मीदी और नाउम्मीदी की धूप-छांव इस तरह एक-दूसरे के गले में हाथ डालकर चलती हैं कि पता ही नहीं चलता कि किस पल धूप आए और किस पल छांव. ज़िंदंगी एकदम सुफ़ैद या स्याह नहीं होती. ये महानताओं और विडंबनाओं से बनी धूसर-सी शै होती है. ये आम आदमी के जीवन की ही सच्चाई नहीं है,बल्कि दुनिया के महान व्यक्तियों के जीवन की भी सच्चाई है. [….]