विस्थापन से बड़ा दुख और कहीं नहीं
दर-ब-दर होने की कई करुण कथाएँ हैं
इतनी अधिक कि जीवन किसी एक ठौर को तरसता रहा
हमने कितनी झोपड़ियाँ खड़ी कीं, याद नहीं [….]
कुछ किताबों को एक ख़ास माहौल में पढ़ने से उनमें छिपे कई पहलुओं को एक साथ समझा और जाना जा सकता है. पर ये भी याद रहे कि वो किताब वो मज़मून उस ख़ास माहौल में आपको दुगना-चौगुना परेशान और बेहाल भी कर सकता है. मैंने यह तब महसूस किया जब पिछले हफ़्ते मुझे माँ के नज़दीक बैठकर लम्बा वक्फ़ा उनके साथ बिताना पड़ा, जिस [….]
फ़रवरी का महीना, बसंत का मौसम और बड़े से घर की बड़ी, खुली छत पे बच्चों के मुंडन या जन्मदिन की पार्टी छोटे-बड़े बच्चे पसंद करें या न करें उनके माँ-बाप, चाचा-ताऊ, मामा-मामी, बुआ-फूफा सब इस मौक़े का लुत्फ़ उठाते हैं ख़ासकर अगर वो दिल्ली की पंजाबी बिरदारी के हों. बसंत का ख़ुशनुमा महकता समां, हल्की पीली धूप, पीले फूल और [….]
रस्किन बॉन्ड की आत्मकथा ‘लोन फ़ॉक्स डासिंग’ के हिंदी में अनुवाद करने के प्रस्ताव के साथ एक शर्त यह भी थी कि अगर मैं अनुवाद न करना चाहूँ तो कोई बात नहीं, पर मुझे भेजी गई किताब की प्रति लौटा ज़रूर दूँ. और बॉन्ड की कहानियाँ पढ़ते, अपने और दोस्तों के बच्चों को पढ़ाते रहने के अपने बरसों तजुर्बे की बिना पर मैंने हामी भर दी थी. अनुवाद [….]
‘मथुरा: अ टेपेस्ट्री ऑफ़ आर्ट एण्ड डिवोशन’ दुनिया के सबसे प्राचीन जीवंत शहरों में से एक, मथुरा की आध्यात्मिक, ऐतिहासिक और स्वाद परंपराओं को दृश्यात्मक समृद्धि के साथ उकेरती है. कृष्ण की धरती के वर्णन में कला, भक्ति और स्वादिष्ट व्यंजनों के माध्यम से यह किताब जान फूँक देती है. नियोगी बुक्स से छपी इस किताब के लेखक प्रदीप भटनागर और बी.के. [….]
‘मतलब हिन्दू’ पढ़ लेने के बाद मुझे लगता है कि अम्बर पाण्डेय के इस उपन्यास का शीर्षक किसी पहेली की तरह है, जिसे दरअसल पढ़ने वाले को ही बूझना है, जिसका जवाब देना है, यह कुछ वैसे ही है जैसे कि हम ‘ख़ाली जगह भरो’ वाले अभ्यास के दिनों में किया करते थे. मतलब के पहले की ख़ाली जगह भरने के लिए पाठक उपन्यास के अपने अनुभव और अपनी मनोदशा [….]
(‘एक मस्त फ़कीरः नीरज’ गोपालदास नीरज की सर्जना के तरीक़े और उनकी फ़िक़्र को बेहतर ढंग से समझने की कुंजी भी है. इस किताब में डॉ. प्रेम कुमार ने उनकी शख़्सियत के कितने ही रंग संजोये हैं, उनके कृतित्व को समझने में मददगार तमाम पहलुओं पर विस्तार से और बेबाकी से बातचीत की है. नीरज से उनका लंबा साक्षात्कार हम यहां तीन कड़ियों में छाप रहे हैं. -सं [….]