वहां पंजाबी ढाबा के बैनर थे, मूंज की रस्सी की चारपाई थी, पान का काउण्टर और एक अदद ब्रांड न्यू ट्रैक्टर खड़ा था. पंजाबी स्पेशल खिलाने का वादा करने वाले उस ठिकाने को इस दुपहरी में तलाशते हुए कलक्टरगंज तक जाना बेकार गया [….]
याद आता है, स्कूल-जीवन में, जब से उपन्यास और कहानियाँ पढ़ने का शौक हुआ, मैंने शरत बाबू की कई पुस्तकें पढ़ डालीं. एक-एक पुस्तक को कई-कई बार पढ़ा और आज जब उपन्यास अथवा कहानी पढ़ना मेरे लिए केवल मनोरंजन का साधन ही नहीं, वरन् अध्ययन का प्रधान विषय हो गया है, तब भी मैं उनकी रचनाओं को अक्सर बार-बार पढ़ा करता हूँ. [….]