विशाखापत्तनम में बंदरगाह पर लगी भीषण आग से ज़रा-सी देर में मछली पकड़ने वाली चालीस नावें जलकर ख़ाक हो गईं.आगजनी से क़रीब 30 करोड़ रुपए के नुकसान का अनुमान है. [….]
फ़िल्म की शुरुआत होती है 1999 से, जहाँ पस-ए-मंज़र में कारगिल की जंग है, और मिर्ज़ा ग़ालिब के नाम से मशहूर उस शे’र से कि ‘ऐ बुरे वक़्त ज़रा अदब से पेश आ, क्यूंकि वक़्त लगता नहीं वक़्त बदलने में’, जहाँ पाकिस्तानी एजेंट ज़ोया के बचपन का वक़्त है अपने पिता नज़र साहब के साथ. इस शे’र को सुनते हुए सलमान की हालिया फ़िल्मों का हस्र भी याद कर सकते हैं. [….]