देर लगी फिर से उस भाव-भूमि पर लौटने में. संकोच का एक विनम्र-सा भाव संवाद में व्याप्त औपचारिक बोझिलता से एक असहमति-सी. मैं उनके मन की उस अप्रत्याशित-सी उथल-पुथल को देख रहा था. ‘एक दिन लौटेगी लड़की’, ‘अंधेरे में बुद्ध’, ‘यह आकांक्षा समय नहीं’ और ‘थपक थपक दिल थपक थपक’ जैसे [….]