“उनकी दुनिया में दाख़िल होने का हुनर मैंने साध लिया था, यह कुछ-कुछ वैसा ही था जैसे कि मकड़ी के जाले का व्यूह भेदने वाला कोई चालाक कीड़ा करता है—ख़ुद को जाल में फंसने से बचाने के लिए अपने पंखों को समेटकर, कम से कम जगह घेरते हुए—मैं अंदर दाख़िल होती और उसी रास्ते से लौटते हुए पूरी एहतियात बरतती कि कहीं जाले के धागों में [….]
नई दिल्ली | लेखक विचारक नहीं हो सकता. अगर वह विचारक हो गया तो दूसरों की न सुनेगा, न कहेगा, वह अपनी ही कहेगा. लेखक जैसा होता है, उसका कुछ अक्स उसके पात्रों में दिख ही जाता है. मेरा मानना है कि ख़ुद को आदमी बनाने की जो गति पहले थी, वह मंद हुई है. अब वह विपरीत दिशा में जा रही है. पहले लगता [….]
सत्रह दिसंबर की रात सूफ़ी परंपरा में मातम की नहीं, विसाल की रात है. मौलाना जलालुद्दीन रूमी के लिए मौत कोई अंत नहीं, बल्कि माशूक़ से मुलाक़ात थी. मेरे लिए रूमी को याद करना, उनके लिखे को पढ़ना, उसे सुनाना हर बार नए शब्दों में लिखना—अपने दिल पे पड़े बोझ को हल्का करने जैसा होता है. रूमी की ज़िंदगी, इश्क़ का उनका फ़लसफ़ा, [….]
नई दिल्ली | राजकमल प्रकाशन समूह की ओर से बुधवार की शाम को इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में ‘हिन्दी उपन्यास का स्त्री वर्ष: भेंट, पाठ, चर्चा’ का आयोजन किया. समकालीन हिन्दी उपन्यासों में स्त्री-स्वर, स्त्री-अनुभव और रचनात्मक विस्तार को रेखांकित करने के उद्देश्य से आयोजित इस कार्यक्रम में राजकमल प्रकाशन से छपे [….]
खूबसूरत छपाई वाली ये पतली-सी किताब मैंने 1978 या 79 की सर्दियों में नैनीताल क्लब के बाहर मॉल रोड पर घूमते हुए एक रेहड़ी वाले से खरीदी थी. चार रंगीन स्लाइडों के सेट के साथ इस गाइडनुमा किताब की क़ीमत कुल आठ रुपये थी. 1914, यानि 111 साल पहले, कानपुर में छपी, नैनीताल स्थित सेंट जॉन-इन-द-विल्डरनेस चर्च के बारे में यह 28 [….]
बरेली | संहिता मंच की पहल ने बहुतेरे लोगों का यह भ्रम तोड़ने का काम ज़रूर किया है कि मंचन के लिए नए नाटकों की बहुत कमी है, कि नए नाटक नहीं लिखे जा रहे हैं. नई पीढ़ी के लोग तमाम भारतीय भाषाओं में नाटक लिख रहे हैं, बढ़िया और दमदार लिख रहे हैं और अपने समय को सलीक़े से दर्ज भी कर रहे हैं. विंडरमेयर थिएटर में बीइंग [….]
नई दिल्ली | यहाँ आयोजित संगीत समारोह ‘सॉन्ग्ज़ ऑफ़ फ़्रीडम – आज़ादी के गीत’ में सुमंगला दामोदरन ने दिल खोलकर गाया. यह कार्यक्रम संभवतः 1857 से लेकर आज तक के प्रतिरोध, क्रांति, संघर्ष और भारतीय आज़ादी आंदोलन के गीतों का सबसे प्रभावशाली और वैविध्यपूर्ण संग्रह था. उन्होंने जलियाँवाला बाग कांड से लेकर टैगोर, [….]
नई दिल्ली | देश में ज़ाइक़े के सबसे बड़े उत्सव का आग़ाज़ दो दिन बाद यानी 12 दिसंबर को जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में होगा. नेशनल स्ट्रीट फ़ूड फ़ेस्टिवल का यह 15वाँ संस्करण होगा. तीन दिन का यह फ़ूड फ़ेस्टिवल 14 दिसंबर तक चलेगा. जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम का गेट नंबर 14 इसका प्रवेश द्वार होगा. [….]
नई दिल्ली | राजकमल प्रकाशन समूह ‘हिन्दी उपन्यास का स्त्री-वर्ष’ मना रहा है. इसके तहत हिन्दी की नौ स्त्री-कथाकारों के उपन्यासों का 3 दिसम्बर को एक साथ लोकार्पण होगा. यह ख़ास आयोजन इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में होगा. यह जानकारी राजकमल प्रकाशन समूह के अध्यक्ष अशोक महेश्वरी ने दी. [….]
नई दिल्ली | प्रख्यात शास्त्रीय संगीत गुरु पंडित अमरनाथ द्वारा रचित ‘हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत का शब्दकोश’ के हिन्दी संस्करण का लोकार्पण बुधवार शाम इंडिया इंटरनेशनल सेंटर-एनेक्स में हुआ. इस मौक़े पर पंडित अमरनाथ की आवाज़ में सहेजी गई विभिन्न रागों की रिकॉर्डिंग का भी विमोचन किया गया, जिन्हें विशाल भारद्वाज [….]
लखनऊ | लखनऊ स्पेक्ट्रम आर्ट फ़ेयर – 2025, शहर की समकालीन कला-यात्रा में एक ऐतिहासिक क्षण बनकर उभरा है— यह कलात्मक विविधता, रचनात्मक संवाद और सांस्कृतिक पुनरुत्थान का उत्सव है. राजधानी की प्रतिष्ठित फ़्लोरेसेंस आर्ट गैलरी की ओर से आयोजित इस विराट कला-मेले में देशभर से 111 कलाकारों की 300 से [….]
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