बरेली | संहिता मंच की पहल ने बहुतेरे लोगों का यह भ्रम तोड़ने का काम ज़रूर किया है कि मंचन के लिए नए नाटकों की बहुत कमी है, कि नए नाटक नहीं लिखे जा रहे हैं. नई पीढ़ी के लोग तमाम भारतीय भाषाओं में नाटक लिख रहे हैं, बढ़िया और दमदार लिख रहे हैं और अपने समय को सलीक़े से दर्ज भी कर रहे हैं. विंडरमेयर थिएटर में बीइंग [….]
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