कुछ तारीख़ें कैलेंडर पर सिर्फ़ अंक नहीं होतीं—वे अपने भीतर एक पूरी सभ्यता का शोक समेटे होती हैं. 18 जनवरी ऐसी ही एक तारीख़ है. 18 जनवरी की उदासी को अगर पूरी तरह समझना हो, तो 1947 के उस ज़ख़्म को भी याद करना पड़ेगा, जिसे हम बँटवारा कहते हैं.
हिंदुस्तान का बँटवारा, वंड, विभाजन या पार्टीशन सिर्फ़ ज़मीन का नहीं था—यह यादों [….]
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