नई दिल्ली | इंडिया इंटरनेशनल सेंटर के कमला देवी सभागार में सोमवार की शाम को अरुंधति राय अपने पाठकों और प्रशंसकों से रूबरू हुईं. यह मौक़ा उनकी ताज़ा किताब ‘मेरी माँ मेरी गैंगस्टर’ पर बातचीत का था. इस ख़ास मौक़े पर उन्होंने कहा, इस किताब में [….]
‘सहर’ — यानी भोर, उजाले की पहली आहट. ज़रा इस मंज़र की कल्पना कीजिए. आप एक किताब के लोकार्पण समारोह में बैठे हैं. किताब, हिंदुस्तान के बीसवीं सदी के बड़े शायर की उर्दू जीवनी का अंग्रेज़ी अनुवाद है. हॉल में उनकी लिखी फ़िल्मी और ग़ैर-फ़िल्मी ग़ज़लें धीमे-धीमे तैर रही हैं. बड़े से मंच के दोनों ओर लगी बड़ी एलईडी स्क्रीन पर एक संजीदा चेहरा बार-बार उभरता है. एक ऐसा [….]
नई दिल्ली | दास्तानगो और रंगकर्मी महमूद फ़ारूक़ी की किताब ‘दास्तान-ए-गुरुदत्त’ का कल शाम लोकार्पण हुआ. गुरुदत्त की ज़िंदगी और उनके समय के भारतीय सिनेमा की गहरी पड़ताल करती यह किताब राजकमल प्रकाशन से छपी है. यह कार्यक्रम हैबिटेट सेंटर के गुलमोहर हॉल में 18वें हैबिटेट फ़िल्म फ़ेस्टिवल के दौरान आयोजित एक विशेष सत्र में हुआ. [….]
4 फ़रवरी, 2010. अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी का न्यू गेस्ट हाउस. पर्शियन रिसर्च इंस्टीट्यूट द्वारा मसनवी पर आयोजित अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी के तीसरे सत्र के बाद का समय. डाइनिंग हॉल में भारत के सुदूर इलाक़ों से एवं ईरान, अफ़ग़ानिस्तान, तज़ाकिस्तान, बांग्लादेश से बड़ी संख्या में आए प्रतिभागी. सब तरफ चर्चाएं, खिलखिलाहटें, बातें ही बातें. बड़ी मुश्किल और कोशिश के बाद जैसे-तैसे हम [….]