नई दिल्ली | राजकमल प्रकाशन समूह और इंडिया हैबिटेट सेंटर साझा पहल के तहत विचार-बैठकी की मासिक श्रृंखला’सभा’ के आयोजन की शुरुआत कर रहे हैं. [….]
कवि-कथाकार राही मासूम रज़ा 1925 में आज ही के दिन ग़ाज़ीपुर के गाँव गंगोली में जन्मे थे. प्रारम्भिक शिक्षा परवर्ती अलीगढ़ यूनिवर्सिटी से हुई, अलीगढ़ यूनिवर्सिटी से ही ‘उर्दू साहित्य के भारतीय व्यक्तित्व’ विषय पर शोध किया. पढ़ाई पूरी करने के बाद कुछ वर्षों तक अलीगढ़ यूनिवर्सिटी में उर्दू साहित्य पढ़ाते रहे. [….]
लखनऊ | देश के छोटे शहरों में सिनेमा, गेमिंग और इंटरेक्टिव शिक्षा देने वाली दक्षिण एशिया की पहली कंपनी ‘जादूज़’ ने यूपी में 500 मिनी एंटरटेनमेंट ज़ोन बनाने की योजना बनाई है. बॉलीवुड वापस आ गया है और ‘जादूज़’, भारत में सबसे तेज़ी से बढ़ती छोटे शहर की सिनेमा और गेमिंग कंपनी उत्तर प्रदेश में अपने बड़े विस्तार के लिए तैयार है. [….]
बरेली की लिटरेरी सोसाइटी के उस जलसे में फ़िराक़ गोरखपुर शरीक हुए थे. उन्होंने अपना क़लाम पेश किया, उसके पहले वसीम बरेलवी की ग़ज़लों के संग्रह ‘आंसू मेरे दामन तेरा’ का विमोचन किया. इसकी ऑटोग्राफ़ की हुई प्रति की नीलामी हुई और रक़म जवानों की भलाई के कोष में दी गई. ख़ासतौर पर बुलाए गए महेंद्र कपूर ने वसीम बरेलवी की दो ग़ज़लें भी गाईं. [….]
(जोश मलीहाबादी की आत्मकथा ‘यादों की बरात’ में दर्ज यह यात्रा-संस्मरण रेलगाड़ी के पहले और 13 मील के छोटे-से सफ़र की याद भर नहीं है, यह उस दौर के लखनऊ का ऐसा मंज़र-नामा भी है, जो लखनवी तहज़ीब, शहर के भूगोल, वहाँ के लोगों और खान-पान के सलीक़े की बानगी पेश करता है. ऐसा ब्योरा जो शायद थोड़े से लोगों की स्मृति में अब भी बचा हुआ हो. -सं ) [….]