क़रीब आधी सदी तक पारसी थिएटर से वाबस्ता रहे फ़िदा हुसैन नरसी उस दौर के रंग-संसार का चलता-फिरता एनसाइक्लोपीडियो थे. संस्कृतिकर्मी प्रतिभा अग्रवाल ने बातचीत के हवाले से उनकी आत्मकथा लिखी है – पारसी थिएटर में पचास वर्ष. एक तरह से यह किताब फ़िदा हुसैन के संस्मरणों का संग्रह है. [….]
किताब
अपना मुल्क