कुछ किताबों को एक ख़ास माहौल में पढ़ने से उनमें छिपे कई पहलुओं को एक साथ समझा और जाना जा सकता है. पर ये भी याद रहे कि वो किताब वो मज़मून उस ख़ास माहौल में आपको दुगना-चौगुना परेशान और बेहाल भी कर सकता है. मैंने यह तब महसूस किया जब पिछले हफ़्ते मुझे माँ के नज़दीक बैठकर लम्बा वक्फ़ा उनके साथ बिताना पड़ा, जिस [….]
संस्कृति