लेकिन अगले दिन बातों का अवसर आसानी से नहीं मिल पाना था— “कल आप साढ़े चार तक आ सकते हैं क्या?” सुबह का समय चाहा तो व्यस्तता बताई गई. अन्ततः गगन जी के साथ बातचीत के अपने लोभ का उल्लेख करते हुए. मैंने तीन बजे तक पहुँचने की कहकर कार्यक्रम [….]
(आज गोपाल दास नीरज का जन्मदिन है. अपने गीतों और कविताओं में वह हमारे बीच हमेशा प्रासंगिक बने रहेंगे. जिन्होंने ‘नीरज की पाती’ बांची हैं, या फिर जिन लोगों ने उनको मंच या फ़िल्मों में लिखे उनके गीतों के मार्फ़त जाना है, उनके लिए नीरज की शख़्सियत का यह पहलू जानना दिलचस्प होगा. नीरज जी अलीगढ़ में आबाद रहे और डॉ.प्रेम कुमार भी. और डॉ. प्रेम कुमार के [….]
(गुफ़्तगूः सरहदों के आर-पार ऐसी किताब है, कथाकार प्रेम कुमार ने जिसमें भारत और पाकिस्तान के अदीबों से अपने साक्षात्कार संजोये हैं. अनौपचारिक साक्षात्कार की उनकी शैली बातचीत से आगे शख़्सियत और उस दौरान की मनःस्थिति का ख़ाका भी है. इनमें से कुछ साक्षात्कार हम पहले छाप भी चुके हैं. इसी श्रृंखला में फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ की बड़ी बेटी सलीमा हाशमी [….]
(पद्मश्री क़ाज़ी अब्दुल सत्तार को उपन्यासकार और आलोचक के तौर पहचाना जाता है, उन्होंने कहानियाँ भी लिखी हैं. ज़ाती तौर पर अपने जानने वालों के बीच वह बेहद बेबाक़ और ख़रे शख़्स के तौर पर जाने जाते रहे. कथाकार प्रेम कुमार ने उनकी शख़्सियत पर एक किताब लिखी है – बातों-मुलाक़ातों में क़ाज़ी अब्दुल सत्तार. [….]
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ की बड़ी बेटी प्रो.सलीमा हाशमी. ए.एम.यू. के ओल्ड गेस्ट हाउस में उनसे जल्दी-जल्दी में हुई वह अच्छी-सी एक बातचीत. छोटी बहन मुनीज़ा के डॉक्टर बेटे अली हाशमी के साथ शीघ्रातिशीघ्र दिल्ली पहुंचने की उनकी वह उतावली-बेताबी. गाड़ी स्टार्ट हुई ही थी कि दिखा, सलीमा जी जल्दी-जल्दी खिड़की का [….]