अपने यहां एक तबका है जिसे शहरों-स्टेशनों का नाम बदलने में मुक्ति दिखाई देती है. एक और तबका ऐसा भी है जिसे सीरियलों के नाम पर ऐतराज़ है. ऐसे लोगों के ऐतराज़ की वजहें एक ही हैं – उन्हें समाज पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव की चिंता खाए जा रही है. [….]
फ़िल्म डायरेक्टर और सिनेमैटोग्राफ़र निकोलस प्रॅफेरे से कोलम्बिया यूनिवर्सिटी के उनके विद्यार्थियों ने पूछा कि फ़िल्म मेकिंग के बारे उन्हें कौन सी किताब पढ़नी चाहिए? निकोलस का जवाब था – डियर थिओ. विन्सेंट वान गॉग के अपने भाई थिओ को लिखे ख़तों का यह संग्रह पढ़ने का मशविरा देने के पीछे उनका तर्क था [….]
महामारी के इस दौर में, जब दुनिया घूमने और लोगों को जानने के जज़्बे पर बंदिश है और घुमक्कड़ी पर ब्रेक लगा हुआ है, फ़िल्म-वेब सीरिज़ के स्ट्रीमिंग प्लेटफ़ॉर्म्स की तरह ही घुमक्कड़ों के व्लॉग भी ख़ूब देखे जा रहे हैं. पूरी दुनिया में घूमते रहे ये व्लॉगर अलग-अलग तहज़ीब के बारे में तजुर्बों के हवाले से बताते रहे हैं. [….]