‘कच्छ कथा’ पढ़ने में मेरी दिलचस्पी इसके छपने से कुछ बरस पहले की है. मैंने अभिषेक श्रीवास्तव का ब्लॉग तो नहीं पढ़ा था मगर चंडीगढ़ लिटरेटर फ़ेस्टिवल से साथ लौटते हुए निरुपम जी ने इस सफ़रनामे की तारीफ़ करते हुए यह भी बताया था कि उनके बहुत बार कोंचने पर भी अभिषेक ने अभी इसे पूरा नहीं किया है. [….]
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