फुटबॉल इतिहास के दो सिरों – पेले और मेसी के बीच अपनी तमाम कमज़ोरियों और अवगुणों के साथ एक मानुस – माराडोना सीना ताने खड़ा है जो सीना ठोककर फुटबॉल के देवताओं को चुनौती देता है. [….]
इस समय सोशल मीडिया पर एक मीम खूब चल रहा है. ये कुछ इस तरह से है कि ‘भगवान सन् 2020 को डिलीट कर दो इसमें वायरस है.’ यूं तो इसे हल्के-फुल्के से परिहास के लिए बनाया गया होगा, पर इस हल्के हास्य के पीछे कितनी क्रूर सच्चाई छिपी है यह किसी से नहीं छिपा है. एक नए अनजाने वायरस की वजह से लाखों लोग जान गंवा चुके हैं [….]
ज़िंदगी इतने विरोधाभासों से भरी होती है कि अक्सर आपको हतप्रभ कर देती है. आप माइकल शुमाकर को याद कीजिए. जर्मन फार्मूला वन का मशहूर ड्राइवर गति का बादशाह था, तीन सौ किलोमीटर प्रति घंटा से भी ज़्यादा तेज़ गति से कार चलाता था लेकिन नियति देखिए एक स्कीइंग दुर्घटना के चलते कोमा में चला गया. एक इतना गतिशील शख़्स एकदम निश्चल हो गया. कल भारत के महानतम फुटबॉलरों में से एक प्रदीप कुमार बनर्जी का देहांत हो गया. [….]
खेल के लिए टीमों का होना ज़रूरी होता है और टीमों के लिए खिलाड़ियों का. लेकिन ये सब बिना फ़ैंस के अधूरे हैं. फ़ैंस अपनी-अपनी चहेती टीम और चहेते खिलाड़ियों के लिए उत्साह, उल्लास, जुनून, दीवानेपन से खेलों की तस्वीर में रंग भरते हैं, वो मुकम्मल होती है. इन फैंस के रंग बड़े अजब-गजब होते हैं. ये फैंस ही हैं जो खेल को और खिलाड़ियों को भी दूसरी दुनिया में पहुंचा देते हैं. [….]
यह आठ मार्च का दिन था. यूं तो उस दिन भी सूरज आम दिनों की तरह ही उगा था. पर उस दिन फ़िज़ाओं में उम्मीदों का गुलाबी रंग थोड़ा ज्यादा ही चारों तरफ फैला था. यह अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस था. उनके हक-हुकूक के मानने-मनाने का दिन जो था. उस दिन बहुत सारे लोगों को और विशेष रूप से खेल प्रेमियों को यह उम्मीद भी थी कि फ़िज़ाओं में घुला ये गुलाबी रंग कुछ और गाढ़ा होकर लोगों के चेहरों से होता हुआ उनके दिलों पर फैल जाएगा. [….]
2019 के विश्व के सर्वश्रेष्ठ फुटबॉल खिलाड़ी का ख़िताब ‘बैलन डि ओर’ मैस्सी ने रिकॉर्ड छठी बार जीता. यहां महत्वपूर्ण बात ये है कि उन्होंने अपना वोट लिवरपूल के फॉरवर्ड सादिओ माने को दिया था. सादिओ माने इस वोटिंग में मैस्सी, वर्जिल वैन डिक और क्रिस्टियानो के बाद चौथे नंबर पर आए थे और तब मैस्सी ने कहा था कि ‘ये शर्मनाक है कि माने चौथे स्थान पर हैं.’ और ऐसा मानने वाले वे अकेले नहीं हैं. [….]
सन् 1996 में जब शेर्लोट होरनेट्स ने 18 वर्ष के युवा कोबे ब्रायंट को पहली बार एनबीए के लिए ड्राफ्ट किया तो वे एनबीए के लिए ड्राफ्ट होने वाले सबसे युवा खिलाड़ी बने थे. ये शायद उनकी नियति थी जो सर्वशक्तिमान ने उनके लिए निर्धारित की थी क्योंकि उसे पता था कि कोबे के पास समय बहुत कम है और उसे हर काम जल्दी करने हैं. [….]